यहां शराब पीती है भगवान भैरव की मूर्ति, कहां जाती है कोई नहीं जानता |

21 नवंबर, सोमवार को भैरव अष्टमी पर्व है। यह दिन भगवान भैरव और उनके सभी रूपों के समर्पित होता है। मध्यप्रदेश के धार्मिक शहर के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन का कालभैरव मंदिर भारत के सबसे अद्भुत मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में विराजित भगवान कालभैरव को प्रसाद के रूप में और कुछ नहीं बल्कि मदिरा यानी शराब चढ़ाई जाती है। इतना ही नहीं वह शराब भगवान कालभैरव ग्रहण भी करते हैं। भगवान के मुंह के आगे शराब को पात्र (बर्तन) में भरकर रखने पर वह अपने आप खाली हो जाता है। यहां पर शराब को प्रसाद के रूप में चढ़ाने के पीछे लोगों की भावना रहती है कि वे अपने सभी दुर्गुणों को भगवान के सामने छोड़ जाते हैं।

आगे की स्लाइड्स पर जानें मंदिर से जुड़ी अन्य खास बातें…

देखते ही देखते खाली हो जाता है पात्र

इस मंदिर में सालों से भगवान कालभैरव को शराब का भोग लगाया जाता है। भगवान के मुंह के आगे शराब से भरा पात्र रखते ही सभी की आखों के सामने वह पात्र खाली हो जाता है। कई लोगों ने भगवान कालभैरव की मूर्ति और पूरे मंदिर परिसर के नीचे की भूमि का परिक्षण तक कर लिया, लेकिन शराब कहां जाती है इस बात का पता आज तक नहीं लगा। इसलिए ही इसे भगवान कालभैरव का चमत्कार माना जाता है।

भगवान शिव का ही एक रूप है कालभैरव

पुराणों के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा ने भगवान शिव का अपमान कर दिया था, इस बात से भगवान शिव बहुत क्रोधित हो गए और उनके नेत्रों से कालभैरव प्रकट हुए। क्रोधित कालभैरव ने भगवान ब्रह्मा का पांचवा सिर काट दिया था, जिसकी वजह से उन्हें ब्रह्म-हत्या का पाप लगा।

राजा भद्रसेन ने करवाया था मंदिर का निर्माण

इस मंदिर का निर्माण राजा भद्रसेन ने करवाया था। मंदिर के चारों ओर पत्थर की लम्बी-लम्बी दिवार बनी हुआ है। कुछ समय बाद राजा जयसिंह ने इस मंदिर का पुननिर्माण करवाया था। मंदिर में भगवान कालभैरव के साथ-साथ भगवान शिव, गणेश, विष्णु और देवी पार्वती की भी मूर्तियां हैं।

पूजे जाते हैं कुलदेवता के रूप में

भगवान कालभैरव को क्षेत्रपाल के रूप में पूजा जाता है, साथ ही कुलदेवता के रूप में भी कालभैरव की पूजा की जाती है। गुरुपूर्णिमा और रविवार को यहां पर भक्तों की विशेष भीड़ लगती है।

कालभैरव मंदिर में पाताल भैरवी भी

कालभैरव मंदिर के मुख्य द्वार से अंदर घुसते ही कुछ दूर चलकर बांई ओर   पातालभैरवी का स्थान है। इसके चारों ओर दीवार है। इसके अंदर जाने का रास्ता बहुत ही संकरा है। करीब 10-12 सीढिय़ां नीचे उतरने के बाद तलघर आता है। तलघर की दीवार पर पाताल भैरवी की प्रतिमा अंकित है। ऐसी मान्यता है कि पुराने समय में योगीजन इस तलघर में बैठकर ध्यान करते थे। 

No comments

Powered by Blogger.